हम उस जीवन की
कल्पना भी
नहीं करते जो हम
प्रेम हो जाने के बाद
जीते हैं।
-प्रभुदयाल खट्टर
यदि आपसे यह कहा जाए कि
जो कुछ भी निरर्थक है
उसे फेंक दो,
जवान लोग शायद
कुछ नहीं फेकेंगे,
बूढ़े लोग
सब कुछ फेंक सकते हैं।
- प्रभुदयाल खट्टर
इंसान का हाथ
एक ऐसा अंग है
जिसकी निजी आंखें हैं,
अपना निजी हृदय है,
निजी दिमाग है,
अपना निजी साम्राज्य है ।
- प्रभुदयाल खट्टर
तुम पानी पर पत्थर मारो,
लाठी मारो, गोली मारो,
पानी नहीं मरेगा,
पानी को आग मार सकती है
और आग
तुम्हारे भीतर है ही नहीं ।
- प्रभुदयाल खट्टर
हम उस जीवन की कल्पना भी नहीं करते जो हम प्रेम हो जाने के बाद जीते हैं। -प्रभुदयाल खट्टर