इंसान का हाथ
एक ऐसा अंग है
जिसकी निजी आंखें हैं,
अपना निजी हृदय है,
निजी दिमाग है,
अपना निजी साम्राज्य है ।
- प्रभुदयाल खट्टर
हम उस जीवन की कल्पना भी नहीं करते जो हम प्रेम हो जाने के बाद जीते हैं। -प्रभुदयाल खट्टर