Sunday, June 12, 2022

भाषा

 जीवन की जो पुस्तक 

हमें पढ़ने को मिली थी, 

उसमें लिखी भाषा 

हमें कभी सीखने को 

मिली ही नहीं थी ।

- प्रभुदयाल खट्टर

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प्रेम

 हम उस जीवन की  कल्पना भी  नहीं करते  जो हम  प्रेम हो जाने के बाद  जीते हैं।  -प्रभुदयाल खट्टर