हम उस जीवन की
कल्पना भी
नहीं करते जो हम
प्रेम हो जाने के बाद
जीते हैं।
-प्रभुदयाल खट्टर
यदि आपसे यह कहा जाए कि
जो कुछ भी निरर्थक है
उसे फेंक दो,
जवान लोग शायद
कुछ नहीं फेकेंगे,
बूढ़े लोग
सब कुछ फेंक सकते हैं।
- प्रभुदयाल खट्टर
इंसान का हाथ
एक ऐसा अंग है
जिसकी निजी आंखें हैं,
अपना निजी हृदय है,
निजी दिमाग है,
अपना निजी साम्राज्य है ।
- प्रभुदयाल खट्टर
तुम पानी पर पत्थर मारो,
लाठी मारो, गोली मारो,
पानी नहीं मरेगा,
पानी को आग मार सकती है
और आग
तुम्हारे भीतर है ही नहीं ।
- प्रभुदयाल खट्टर
जो माता-पिता के
समक्ष संतान है
और जो संतान के
समक्ष माता-पिता है,
वही
सनातन ईश्वर है।
- प्रभुदयाल खट्टर
यह सच है कि जो कपड़े
हम पहनते हैं
उसमें, सिर्फ दो या चार
जेबें ही होती हैं,
लेकिन दिमाग में,
दो या चार सौ जेबों से कम
जेबें नहीं होती,
या दो या चार हजार जेबें
होना भी संभव है ।
- प्रभुदयाल खट्टर
अगली पीढ़ी को
देने के लिए
आपके पास पहले से ही
बहुत कम है,
इसे और कम न करें।
- प्रभुदयाल खट्टर
मैं उतनी आसानी से
दरवाज़ा
बंद नहीं कर सका,
जितनी आसानी से
तुम दरवाज़ा
खोलकर चले गए।
- प्रभुदयाल खट्टर
कभी समय निकाल कर,
तुम बैठ कर
आसमान को देखा करो,
और सोचो कि
आसमान,
आसमान में क्यों है?
- प्रभुदयाल खट्टर
क्या आप जानते हैं
प्रेम की सबसे
बड़ी विशेषता क्या है?
प्रेम पूरे शरीर को
हृदय में बदल देता है।
- प्रभुदयाल खट्टर
अगर तुम्हारे पास
कुछ नहीं है
तो भी तुम बहुत कुछ
दे सकते हो,
अगर तुम एक
कलम को उठा सको ।
- प्रभुदयाल खट्टर
यदि कविता
लिखना चाहते हो तो पहले
मनुष्य बनो,
यदि मनुष्य बनना
चाहते हो
तो पहले कविता लिखो।
- प्रभुदयाल खट्टर
पेड़ से पत्ते
टूट कर गिर जाते हैं,
हम अक्सर देखते हैं
कितने ही लोग
इस घटना को देखते हैं
और समझते हैं
कि पत्ते
वास्तव में गिरते नहीं,
बल्कि मर जाते हैं।
- प्रभुदयाल खट्टर
हमारे बच्चे ढेर सारी
किताबों से डरे हुए हैं,
चलो अब नए
स्कूल खोलें जिसमें हों
सिर्फ मैदान खेल के ।
- प्रभुदयाल खट्टर
जिन शिक्षकों ने
मुझे कविता
लिखना सिखाया,
वे थे फूल,
नदियाँ, आसमान
और हाँ,
इन सबसे पहले तुम ।
- प्रभुदयाल खट्टर
एक पक्षी भी जो
बहुत ऊँचा
उड़ सकता है,
अपनी अंतिम उड़ान
के समय चुपचाप
धरती पर
आकर बैठ जाता है।
- प्रभुदयाल खट्टर
तुम्हारे अंदर जो बैठा है,
जो चलाता है तुम्हें,
वह तुम नहीं हो,
वह वो है,
जो तुम्हें भी होना चाहिए।
- प्रभुदयाल खट्टर
जीवन की जो पुस्तक
हमें पढ़ने को मिली थी,
उसमें लिखी भाषा
हमें कभी सीखने को
मिली ही नहीं थी ।
- प्रभुदयाल खट्टर
तुम्हारे पास
इतना लंबा धागा नहीं है
कि तुम अपने सभी
फटे कपड़ों को सिल सको,
बेहतर यही है
कि तुम अपने कपड़ों को
फटने ही न दो ।
- प्रभुदयाल खट्टर
नदी में
उतरने वालों के लिए,
किनारा प्रारंभ है,
नदी से बाहर
आने वालों के लिए
किनारा,
अंत है ।
-प्रभुदयाल खट्टर
इधर-उधर बिखरे
पंछी के टूटे पंख
उसके
स्वतंत्रता संग्राम के
बारे में भी बताते हैं
हमको ।
- प्रभुदयाल खट्टर
अपनी थाली में
परोसा खाना खाइए,
दूसरे की थाली
आपको दी जाएगी,
सिर्फ इसलिए
कि आप,
अपनी थाली पर से
कब्जा छोड़ दें ।
- प्रभुदयाल खट्टर
हम उस जीवन की कल्पना भी नहीं करते जो हम प्रेम हो जाने के बाद जीते हैं। -प्रभुदयाल खट्टर